निर्मल बाबा को हमने बनाया, वह अवतरित नहीं हुए
भुट्टे को खाकर या खिलाकर अपने जीवन को संवार, जा गरीबों मैं डोसा और इडली बाँट आ. निर्मल बाबा के तरीको पर पूरे देश मैं चर्चा हो रही है. पर ये चर्चा जिस मुकाम पर पहुच चुकी है वह यही दर्शाता है की निर्मल बाबा ने आखिर ग़लत किया क्या? किसी को बन्दूक की नोक पैर समागम मैं बुलाया नहीं, किसी को वशीभूत कर टीवी के आगे बिठाया नहीं, किसी की जेब नहीं काटी किसी को जबरदस्ती लूटा नहीं. उन्होंने तोह सिर्फ हम सब के खोते आत्मविश्वास का फायेदा मात्र उठाया. इसमें उनकी ग़लती क्या है? इसमें तोह हमारी ग़लती है और हमारे समाज का दोष है. हम ही ने तोह उन्हें भगवान् बना दिया, उनकी फालतू बातों को तवज्जौ देके. निर्मल बाबा क्योँ सही हैं इसे जानी के लिए हमें थोडा आत्म चिंतन कर लेना चाहिए. जिस देश मैं प्रमुख चिंता का विषय "अस्स्मान से लौटा बौना हो" या जिस देश के प्रमुख टीवी चनेलोउन पर खामखा की चर्चा इस बात पर हो की शारुख को अमरीका ने एअरपोर्ट पर क्योँ सुरक्षा जांच के नाम पर पकडे रक्खा उस देश से आप क्या उम्मीद रखते हैं? आज सभी न्यूज़ चैनल इस बात को साबित करने लगे हैं की निर्मल बाबा कितने पाखंडी हैं. क्या ये बात उन्हें तब नहीं पता लगी जब वोह अपना विज्ञापन उन्हीं टीवी चैनल पर दिखने के लिए पैसे देने पहुचें होंगे. और इस सब बात के बावजूद जब न्यूज़ ख़त्म होती है तोह विज्ञापन फिर निर्मल बाबा का आजाता है. कहीं ये टीवी चैनल और बाबा की ही मिलीभगत तोह नहीं? कई टीवी चैनल ये भी कह रहे हैं की वोह बाबा की बाटूँ से इत्तफाक नहीं रखते और १२ may से इन विग्यपनौन को बंद करदेंगे. एक महीने बाद क्योँ? अभी क्योँ नहीं? असल मैं इस देश को आदत पड़ गयी है वख्त जाया करने की. निर्मल बाबा कोई मुद्दा नहीं है चर्चा का, उसे मुद्दा बनाया जा रहा है, ताकि हम अहम् मुद्दौं के बारे मैं गौर करें ही नहीं. ताकि कुच्छ लोग इस बात का फायेदा उठा पायें. पहले कश्मीर को मुद्दा बना कर, फिर और छोटे छोटे मुद्दे पैदा करके. हमको आज सही मैं निर्मल बाबा की ज़रुरत है, क्यूंकि हम बेवक़ूफ़ हैं और भुट्टे और दोसे खिला कर भी हमें कोई भी बेवक़ूफ़ बना सकता है. मीडिया का सिर्चुस सुबह से शाम चलता रहता है, उसे देख देख कर हम मजे करते हैं, आई पि एल क्रिकेट देखते हैं , सास बहु का ड्रामा देखते हैं, एक दुसरे को गाली देते हैं, सो जाते हैं. और यही हम करते रहेंगे. नूपुर तलवार को सी बी आई ढूंढती रहेगी, वोह चुपचाप कोर्ट मैं जाकर जमानत लेलेंगी, आरुशी का केस कभी सोल्वे नहीं हो पायेगा, जेस्सिका को फिर कोई गोली मार देगा, राम गोपाल वर्मा उसपर फिल्म बना देगा, फिर कोई निर्मल बाबा आके जनता को नोचेगा, हम भी नुचवाते रहेंगे, टीवी चैनल कभी रोबेर्ट वढेरा का सच जनता को नहीं बताएगी, सिर्फ प्रिंस को गड्ढे मैं गिराने की खबर हमको रटाती रहेगी, हम खुश रहेंगे लेकिन हमारी आने वाली नस्ल हमें कभी माफ़ नहीं करेगी. और सिर्फ यही कहेगी की हमारे पूरख मूरख थे
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