रेज़ॉल्यूट डेस्क VS नाक का गोला
व्हाइट हाउस की ओवल ऑफिस में एक ऐतिहासिक मेज़ विराजमान है—रेज़ॉल्यूट डेस्क। नाम में ही ऐसी दृढ़ता है कि लगता है जैसे यह कोई मेज़ न होकर स्वयं राष्ट्रपति हो। मेज़ को हेयस डेस्क भी कहते हैं, परंतु हेयस साहब तो एक बार राष्ट्रपति बने थे, मेज़ ने तो अब तक कई राष्ट्रपतियों को झेला है।
यह मेज़ 1880 में ब्रिटेन की महारानी क्वीन विक्टोरिया ने अमेरिका के राष्ट्रपति रदरफोर्ड बी. हेयस को उपहार में दी थी। यह सुनकर भारतीय मन में स्वाभाविक प्रश्न उठता है—भला कौन महारानी इतनी दयालु होती है? लेकिन असल बात यह है कि यह मेज़ किसी फर्नीचर की दुकान से नहीं खरीदी गई थी, बल्कि यह HMS Resolute नामक ब्रिटिश जहाज के लकड़ी से बनी थी। और HMS Resolute भी कोई आम जहाज नहीं था—यह एक खोजी जहाज था, जो 1854 में आर्कटिक में फंसकर त्याग दिया गया था।
अब अमेरिका ने सोचा कि यह अच्छा मौका है एक सद्भावना भरा काम करने का। उन्होंने इस लावारिस जहाज को उठाया, इसकी मरम्मत करवाई, और 1856 में बड़ी शान से ब्रिटेन को लौटा दिया। ब्रिटिशों को सद्भावना की इतनी आदत नहीं थी, तो वे भावुक हो गए। 1879 में उन्होंने जहाज को सेवानिवृत्त किया, लकड़ी निकाली और तीन मेज़ें बनवा दीं। इनमें से एक उन्होंने अमेरिका भेज दी, यह सोचकर कि 'जो जहाज वापस किया था, अब उसका एक टुकड़ा रख लो!'
अब अमेरिका को इतनी ऐतिहासिक मेज़ मिली, तो उन्होंने उसे ओवल ऑफिस में रख दिया। राष्ट्रपति आते-जाते रहे, लेकिन मेज़ वहीं की वहीं रही। 1945 में इसमें घुटनों के लिए जगह बनाई गई, ताकि राष्ट्रपति बैठकर पैर फैला सकें—आखिर बैठने की भी एक गरिमा होती है। फिर 1961 में इसकी ऊंचाई दो इंच और बढ़ा दी गई, शायद ताकि राष्ट्रपति थोड़े ऊंचे महसूस करें।
अभी पिछले दिनों दुनिया के सबसे अमीर आदमी एलोन मस्क ने एक ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डाली। वह भी सीधे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के ओवल ऑफिस में, जो कि व्हाइट हाउस में स्थित है। जब कोई मीटिंग बहुत गंभीर न हो, या फिर मस्क को पहले से पता हो कि यहाँ कुछ खास निकलने वाला नहीं है, तो वे अपनी "फैमिली पैकेज" के साथ पहुंच जाते हैं—बच्चे, बच्चों की आया. अब उस प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने क्या कहा, यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना कि उन्होंने क्या किया। मुख्य आकर्षण उनका भाषण नहीं, उनका बेटा निकला। कभी कंधे पर लटका, कभी डेस्क के नीचे घुसा, उस छोटे से बच्चे, जिसका नाम ‘X’ है, ने ट्रम्प को हड़काते हुए कह दिया— "मुँह बंद रखो!" और आखिर में राष्ट्रपति को ही हटने का आदेश दे दिया—"तुम राष्ट्रपति नहीं हो!" यह कोई आम धमकी नहीं थी। यह एक भविष्यवाणी थी। बच्चे जानते हैं कि दुनिया में क्या होने वाला है।
जाते-जाते छोटे से बच्चे ने रेज़ॉल्यूट डेस्क पर अपना नाक का गोला छोड़ दिया। यह किसी भी ऐतिहासिक डेस्क के लिए सम्मान की बात होनी चाहिए। आखिर, इससे पता चलता है कि वह डेस्क अब भी प्रासंगिक है, अब भी जीवित है! वही डेस्क, जो समुद्र के सफर के बाद लंदन घूमकर अमेरिका आई थी और राष्ट्रपति कार्यालय की शोभा बढ़ा रही थी।
अब यह तो तय है कि ट्रम्प ने तुरंत अपने किसी नौकर को बुलाकर डेस्क साफ करने को कहा होगा। या शायद किसी सैनिटाइजर से रगड़-रगड़कर उसकी शुद्धि कराई होगी। लेकिन जब दोपहर के खाने के वक़्त, ‘लंच ब्रेक’ की तख्ती लगाकर, ट्रम्प अपना टिफिन खोलकर उसी डेस्क पर खाने बैठे होंगे, तो नज़र उस जगह ज़रूर गई होगी, जहाँ गोला चिपका था। और फिर भूख मर गई होगी। टिफिन बंद कर दिया होगा। सोचा होगा— "आज मंगलवार का व्रत रख लेता हूँ।"
जब हफ्ते-दो हफ्ते में वज़न दो-ढाई किलो घटा, तब जाकर उन्होंने वह डेढ़ सौ साल पुरानी डेस्क ही हटवा दी। अब या तो वह मरम्मत के लिए गई होगी, या उस पर नई पॉलिश कर दी गई होगी, या फिर ट्रम्प उसे ज़ंजीरों में बाँधकर अपने जहाज में ठूंसकर लंदन वापस भिजवाने का मन बना रहे होंगे। ट्रम्प हैं, कुछ भी कर सकते हैं!
लेकिन बात सिर्फ इतनी थी कि एक छोटे बच्चे के नाक के गोले से क्या ही नुकसान हो जाता? अगर ऐसा है, तो हिंदुस्तान के हर स्कूल की डेस्क हटा देनी चाहिए। बल्कि स्कूल ही क्यों, ऑफिस, बस की खिड़कियाँ, जहाज की कुर्सियाँ, यहाँ तक कि संसद की सीटें और मंत्री महोदय की टेबल भी। क्योंकि जहाँ देखो, वहाँ कोई न कोई गोला चिपका मिलेगा। बल्कि कुछ लोग तो इसे अपनी परंपरा समझते हैं।
अब देखिए, यह जो गोला-चिपकाने की परंपरा है, यह इतनी भी गैर-जरूरी नहीं है। यह हमारी सभ्यता का हिस्सा है। जिस तरह गुफाओं में हमारे पूर्वज चित्र बनाते थे, वैसे ही आज की आधुनिक पीढ़ी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए हर सतह पर नाक का गोला चिपका देती है। यह कला का एक सूक्ष्म, मगर उपेक्षित रूप है।
अब ट्रम्प को क्या परेशानी थी? उन्हें तो यह भी सोचना चाहिए था कि उन्होंने भी कभी बचपन में अपनी डेस्क पर कोई गोला चिपकाया ही होगा। शायद अब उम्र हो गई, तो भूल गए। या हो सकता है कि ओवल ऑफिस की गद्दी इतनी चमकदार हो कि अतीत की सारी यादें मिट जाएं।
अब ट्रम्प ने वह डेस्क हटवा दी। क्यों? क्या एक छोटे से गोले से उनकी शक्ति कम हो जाती? क्या उन्हें डर था कि यह गोला उनके राजनीतिक करियर पर भारी पड़ जाएगा? या फिर उन्हें इस बात का डर था कि यह गोला वहीं रहेगा और अगली बार जब वह बैठेंगे, तो अचानक उन्हें एहसास होगा कि सत्ता तो बहुत क्षणभंगुर होती है, लेकिन गोले अमर होते हैं।
मेरा तो यही सुझाव रहेगा कि दुनिया के सारे ऐतिहासिक डेस्क पर एक विशेष सुरक्षा परत चढ़ा दी जाए—गोला-प्रतिरोधी परत! ताकि भविष्य के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, अफसर और आम जनता निश्चिंत होकर इन डेस्क का इस्तेमाल कर सके, बिना यह सोचे कि कब, कहां, और किसका गोला चिपका मिलेगा!
-विवेक तिवारी

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