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Showing posts from September, 2024

बड़ा तमाशा

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  आज सुबह जब घर से निकला, तो देखा कि मेन गेट पर गार्ड और आसपास के लोग किसी रहस्यमयी घटना का मूक दर्शक बने खड़े हैं। सबकी निगाहें एक ही दिशा में जमी हुई थीं, जैसे वहाँ कोई विश्व युद्ध हो रहा हो और वे चुपचाप उसकी रिपोर्टिंग कर रहे हों। मैंने सोचा, "कहीं बम तो नहीं फट गया? कोई धरना-प्रदर्शन तो नहीं हो रहा?" पर सामने कोई कर्फ्यू जैसी हालत तो नजर नहीं आए। भीड़ देखकर दिल में अजीब बेचैनी होने लगी। लोगों के चेहरे ऐसे थे, जैसे किसी महान रहस्य का उद्घाटन होने वाला हो, पर रहस्य था कि समझ में ही नहीं आ रहा था। अब मेरा मन भी बेचैन होने लगा, मैंने सोचा, "कहीं कोई एक्सीडेंट तो नहीं हो गया? या फिर कोई मारपीट?" और फिर एक और ख्याल आया—"अरे भाई, यह सुबह-सुबह खून-खराबा देखना मेरी पाचन शक्ति के विपरीत होगा!" मन में डर बैठ गया, "कहीं कुछ बुरा न हो गया हो?" सामने से एक लड़का साइकिल पर आता दिखा, उसके चेहरे पर भी वही जिज्ञासा थी जो बाकी लोगों के चेहरों पर छपी हुई थी। साइकिल रोकते ही वह भीड़ का हिस्सा बन गया, जैसे कोई दर्शक अपने पसंदीदा टीवी सीरियल का सस्पेंस जानने को आतु...

आतिशी का मुख्यमंत्री बनना: केजरीवाल की हिमालय यात्रा की शुरुआत?

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अरविंद केजरीवाल ने एक बड़ा राजनीतिक कदम उठाते हुए आतिशी को दिल्ली का मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया है। अब हर कोई ऐसे बात कर रहा है जैसे कि अचानक से हर आदमी राजनीति का विशेषज्ञ बन गया हो। "अब तो आतिशी ही दिल्ली का भाग्य बदलेंगी," ऐसा कहा जा रहा है, जैसे मुख्यमंत्री बनना किसी सुपरहिट फिल्म का टिकट मिल जाना हो । यह ठीक वैसा ही है जैसे किसी गाँव में कोई नई महिला प्रधान बनती है, और लोग उसके अनुभव और योग्यता पर चर्चाएँ शुरू कर देते हैं। स्वाभाविक है.  राजनीति का एक अजीब सा नियम है—जिसे कुर्सी मिल जाए, वह पहले इंसान रहता है, फिर धीरे-धीरे कुर्सी का हिस्सा बन जाता है। आतिशी भी शायद पहले ‘भारी मन से जिम्मेदारी निभाने’ की बात करेंगी, और फिर धीरे-धीरे कुर्सी की जिम्मेदारी उसी कुर्सी को सौंप देंगी। केजरीवाल का यह निर्णय साहसिक है, पर इसका परिणाम अभी अनिश्चित है। कुर्सी पर बिठाना एक बात है, लेकिन उसे संभालकर रखना बिल्कुल दूसरी बात। आतिशी के क्षत्रिय होने की खबर से देश में हलचल मच गई है। लोग सोच रहे हैं कि क्षत्रिय होना सत्ता के स्वाभाविक हक की गारंटी है। जैसे सत्ता का स्वाद चखते ही सारी मुश...