घटनाएँ

काफी दिन बाद ब्लॉग लिखने का मन किया। मन तो कई दिनो से था लेकिन मुद्दे पैर टिपण्णी करने का मन सा नहीं हो रहा था। पैर क्यूंकि घटनाक्रम पिछले दिनो ऐसे चले की आज सोचा ब्लॉग को धन्य कर ही डालूँ। असल मैं कई घटनाएँ घटीं। रिटेल पैर FDI पैर सरकार की जीत, गुजरात मैं सत्ता की मारामारी, हिमाचल मैं चुनाव, अरविन्द केजरीवाल की आम पार्टी का आगमन, मनसे कोपोराटर का पैसंत साल के बुजुर्ग को अपमानित करना, ठाकरे जी का जाना और उनके जाने के बाद फेसबुक पैर टिपण्णी करके फंसी बेचारी दो लड़कियां, कसब को फांसी, पोंटी चड्ढा की हत्या और न जाने क्या क्या।  मैं इन सब मुद्दौं पैर थोडा थोडा अपनी राय रखना कहूंगा। उल्टा शुरू करता हूँ मान्यवर शराब के सदियौं से ठेकेदारी करने वाले पोंटी चड्ढा से। पहले खबर आई उनके भाई को गोली मार दी, दस मिनट बाद खबर आई वोह खुद ही चपेट मैं अगये और इन सब मैं एक नया नाम उभरा, जिसे आम आदमी उतना नहीं जनता था और वोह नाम था सुखदेव सिंह नामधारी का। नामधारी एक चोला पहनते हैं, सफ़ेद रंग का, लम्बी दाढ़ी है। देखते ही वोह एक संस्कारी सिक्ख दीखते हैं। शायद हों भी। लेकिन उनकी एक तस्वीर जो टीवी पैर देखि जिसमें वोह उत्तराखंड के किसी शहर मैं सरेआम गोलियां चलाते भाग रहे हैं, किसी को दौड़ा रहे हैं। शहर को जंगले बनादेने का ऐसा सबूत और नहीं मिल सकता। सुना तोह ये भी है पोंटी जी की 200 करोड़ रुपये नामधारी के पास पड़े थे जिसे वोह दबाना चाहते हैं। हमें नहीं पता की सच क्या है झूठ क्या है, अगर उन्होंने इसी लिए पोंटी को गोली मार दी या अपने बचाव मैं या फिर ग़लती से ये सब तोह कोर्ट फैसला करेगी, लेकिन हम किस दुनिया मैं जी रहे हैं। उत्तराखंड के अल्प्समुद्याए के अध्यक्ष? क्या किसी भी कानून से न डरने वाले को हम ऐसे एहम पदौं पैर देखते रहेंगे, जैसे सिरसा के कांडा ? मुझे नहीं लगता की कानून को अपनी जेब मैं रखने वाले किसी इंसान को भी हिंदुस्तान मैं अपनी शर्तोउन पर कुच्छ भी करने का हक होना चाहिए। भगवन पोंटी और हरदीप की आत्मा को शांति दे पैर जिसने भी अपने अहंकार को बड़ा बना कर अपनी लालसा पूरी करनी चाहि है, उसका अंत बड़ा दर्दनाक हुआ है। लेकिन दर्दनाक अंत तोह कसाब का भी होना चाहिए था। कसाब को फांसी देदी। जिस तरीके से दी वोह सचमुच अद्भुत और प्रशंस्न्य है पैर उसे फांसी क्योँ दी गयी क्या ये बाद कभी कसब ने समझी? या कोई भी उस जैसा समझेगा? उसकी फांसी से कोई दो राइ नहीं उन सब को थोडा सा संतोष हुआ होगा जो उसके हाथौं पानी ज़िन्दगी उजद्वा बैठे। कसाब और उस जैसे कई कसाब सिर्फ दुनिया मैं मरने ही आते हैं, उनकी ज़िन्दगी का न कोई महत्व होता है और न ही उनकी कोई दिशा होती है, मज़हब को अपना शास्त्र बना कर वोह सिर्फ नफरत और दुःख पहुचना जानते हैं। लेकिन इसका थोडा सा भी आभास उन्हें नहीं होता। और तब तक नहीं होगा जब तक उनको दुःख नहीं होगा। लेकिन पाकिस्तान मैं बैठे उनके आका सिर्फ अपनी रोटियां सेंकते हैं, ऐसे कसाब जैसे अनगिनत उल्लुऔन की मौत से उठी आग से। एक कसाब के मरने से सारे कसाब नहीं मरेंगे। 
ठाकरे जी की मृत्यु एक सैलाब लेके आई। इतना जन समूह मैंने अपनी ज़िन्दगी मैं नहीं देखा और ये भी पता है की अब ऐसा होगा भी नहीं। पैर फेसबुक पैर अपनी राइ रखने वाली लड्कियौं पैर करवाई जल्दबाजी मैं की गयी। ऐसा नहीं होना चाहिए था। हमें समझना चाहिए। 
लेकिन इससे भी शर्मनाक बात जिसको कत्तई बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए था वोह था एक कॉर्पोरटर का 65 साल के बुज़ुर्ग पैर हाथ उठाना। ये हम सब पैर तम्चा है, हमारा खून खुलना चाहिए था। हम ऐसे कैसे देखसकते हैं। ये हमारे ही बुज़ुर्ग हैं, हमारे बाप दादा जैसे। और ये हम क्योँ होने दे रहे हैं? एक तोह इस उम्र मैं भी उनको काम करना पद रहा है यही हमारे लिए शर्म से डूब मरने की बात है और ऊपर से कानून की धज्जियाँ उड़ने वाले इंसान का इस तरह दुनिया के सामने उनपर थप्पड़ बरसना। अआपने अगर विडियो देखा होगा तोह उस इंसान की आँखौं मैं नफरत भी देखि होगी जो हाथ उठा रहा था। ऐसी नफरत? हमें तोह संस्कार दिए गए की बदौन के आगे आँख भी नहीं उठानी चाहिए और वोह इंसान उनको गन्दी गाली देता हुआ झापड़ मार रहा है, और अभी तक एक पद पैर आसीन है। ये कैसा समाज है? किसी ने कहा की दुनिया 2012 मैं ख़तम हो जाएगी, मायने अब समझ मैं आने लगे हैं। 
अरविन्द केजरीवाल की टोपी पार्टी आम आदमी पार्टी का ऐलान होगया। वोह अब तक अलग खड़े थे लेकिन भीड़ मैं शामिल होगये। एक और पार्टी हिन्दुसत्न को मिल गयी। ये तोह वख्त ही बताएगा की पार्टी कितने वोट पायेगी पैर हिंदुस्तान मैं corrupt  नेतौं से दो दो हाथ करने के लिए तोह आपने पार्टी बना दी पैर हिन्दुस्तानी corrupt वोटर से दो दो हाथ कैसे करेंगे? जिसके लिए लड़ रहे हैं वोह तोह अपने भगवन तक का नहीं हुआ। टाइम पास करने हजारौं आयेंगे पैर वोट देने कोई नहीं आता। ये रास्ता इतना आसान नहीं है पैर अच्छा है हमारी शुभकामनायें है क्योँ की आम आदमी पार्टी जो है, हम तोह आम ही रहेंगे आपको ख़ास बनाने के लिए। 
हिमाचल के चुनाव बड़े ही फीके रहे। क्यूंकि वोटिंग और काउंटिंग मैं बहुत लम्बा फासला आगया। सबको पता है ऊँट की ओरे करवट लेगा पैर धक् धक् है की बढती जाती है। हमेशा से हिमाचल को अलग थलग कर दिया  जाता है।कुऔन्कि गुजरात ज्यादा मसालेदार चुनाव है इसलिए फटाफट हिमाचल मैं चुनाव करके सिर्फ गुजरात पैर अपनी जान लगा दी। कमाल है। लेकिन इससे किसी का भला नहीं होगा। हिमाचल मैं चुनाव अगर कांग्रेस जीत भी जाती है तब भी उसका असर गुजरात पैर कत्तई नहीं होगा। दोनों की राजनीती अलग है, लोग अलग हैं, सोच अलग है। अच्छा ये रहता की चुनाव करके सरकार बनाकर हिमाचल मैं आगे की व्यवस्था बनायीं जाती। कुच्छ काम किया जाता। अब सब लटका पड़ा है। खैर, गुजरात मैं बड़ा घमासान है, बड़ा प्रदेश है, तरक्की की दिशा पैर है। मोदी को वहां से डिगाना कांग्रेस के लिए कटाई आसान नहीं। और तीसरी बार भी मोदी ही आने वाले हैं तोह क्योँ ये ड्रामा ऊपर से कांग्रेस की कलाई उनके विज्ञापन ने खोल दी। इतना सत्यानाश करवा कर उन्हें अभी भी लग रहा है शायद सत्ता मिल जाए पैर सचमुच जो तरक्की गुजरात मैं देखने को मिली है उसके बाद वहां काबिज़ भी मोदी को ही होना चाहिए। और अगर वोह भावी प्रधान मंत्री बन भी जाएँ तोह ये देश का ही भला होगा। हिंदुस्तान को एक खामोश, और डरे डरे रहने वाले प्रधानमंत्री की नहीं एक दबंग और कठोरे प्रधानमंत्री की ज़रुरत है। 
लेकिन ऐसे देश का क्या किया जाए  सत्ता धारी पार्टी सिर्फ बैठ के नेता गिरी करती है। FDI पैर लोक सभा मैं उन्होंने सीमायें ही लांघ दी। मुलायम और माया ने तो सर्कार को बचने का जैसे ठेका  लिया हुआ है।सुना है की CBI से पीट दिए जाने कि  दी गयी है। पैर ऐसे देश कैसे चलेगा  पैर  और पीछे कुच्छ। वैसे भी इन दोनों से हिंदुस्तान कोई उम्मीद है नहीं। रही सही कसर सरकार ने  निकाल दी। FDI देश के लिए अच्छा है या  ये तोह वख्त ही बताएगा पैर सर्कार का अहंकारों से भरा चेहरा ज़रूर दिख जाता है गाहे बगाहे . इनको पता है तिकड़म कैसे भिड़ानी है . इनको पता है कब कौनसी नब्ज़ पकडनी है। इनको पता है सत्ता कैसे बचानी है। इनको ये नहीं पता हिंदुस्तान का भला कैसे होगा। क्यूंकि वोह इनके पार्टी मैनिफेस्टो मैं भी नहीं है। 

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