नाम गडकरी है

नाम गडकरी है , और काम मसखरी है .
मुहं है जब भी खोला, कराइ किरकिरी है ..
रंग हुआ न चौखा, और साख  भी गिरी है। 
हिंग की जगह लगाई  दाऊद की फिटकरी है। 
कमल क्या खिलेगा, जब पाँव फँस रहा है। 
शारीर का मोटापा कीचड मैं धंस रहा है। 
अफीम की लो राय, थोडा वजन घटाओ, 
दो चार पाँव छु ओ, गुजरात घूम आओ। 
-:अफीम:- 

Comments

Popular posts from this blog

पुरानी किताब का किस्सा (पार्ट 1)

टौंस के उस पार: जब न्याय के देवता ने पहली बार हिमाचल में बसेरा किया

AI and Filmmaking — What’s Really Changing?