टौंस के उस पार: जब न्याय के देवता ने पहली बार हिमाचल में बसेरा किया
पहाड़ों में नदियाँ रास्ता रोकती हैं , पर रिश्ते नहीं तोड़तीं। टौंस नदी के दोनों किनारों के लोग इस बात को सदियों से जानते हैं। दिसंबर 2025 में यह बात एक बार फिर सच साबित हुई , जब एक देवता ने पैदल चलकर यह नदी पार की। चलते हुए देवता हिमाचल के सिरमौर ( गिरिपार ) और उत्तराखंड के जौनसार - बावर में महासू महाराज को न्याय का देवता माना जाता है। मान्यता है कि वे चार भाई हैं : बोठा , पवासी , बाशिक और चालदा। तीन भाई हनोल के मंदिर में विराजते हैं , पर सबसे छोटे चालदा महाराज कहीं टिककर नहीं रहते। वे गाँव - गाँव जाते हैं , लोगों के बीच रुकते हैं , उनकी पीड़ा सुनते हैं और आगे बढ़ जाते हैं। इसीलिए उन्हें " चलायमान देवता " कहा जाता है। लोक - परंपरा के अनुसार उनकी यात्रा का एक पूरा चक्र 24 वर्षों का होता है। बारह वर्ष वे साटी क्षेत्र में रहते हैं और बारह वर्ष पासी क्षेत्र में। कहीं छह महीने , कहीं एक साल , तो कहीं दो साल का ठहराव होता है। वह बकरा , ज...