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Showing posts from December, 2012

शर्मनाक घटना

दिल्ली में दो दिन पहले जो कुछ हुआ वो सिर्फ दिल्ली के लिए ही नहीं पूरे हिंदुस्तान के लिए डूब मरने का विषय है। एक लड़की के साथ बलात्कार और वोह भी दिल्ली की सड़क पर। ऐसा नहीं है कि उस रात कुछ और ऐसी घटना नहीं घटी होगी, पूरे हिंदुस्तान मैं कहीं न कहीं ऐसी कई वार्दातौं को अंजाम दिया गया होगा, लेकिन अफ़सोस की सभी घटनाएँ खबर नहीं बनती। लेकिन हमें सोचना होगा ऐसा हो क्योँ रहा है। हरियाणा में पिछले दिनौं बच्चों से बलात्कार, फिर न जाने दिल्ली में तोह सुरक्षा जैसे हो ही न। असल में समाज से दर अब धीरे धीरे ख़त्म हो रहा है। मैं ये नहीं कहता की डर डर कर जीना ठीक है, पैर किसी भी ग़लत काम को अंजाम देने के बाद उसके परिणामों का डर। रहा ही नहीं है।  मैंने अपनी स्तातक की पढाई दिल्ली यूनिवर्सिटी से की है, और जिन लोगौं ने दिल्ली के नार्थ कैंपस मैं पढाई की है, उन्हें बहुत अच्छे से पता है की वहां लडकियौं के लिए ये फब्तियां सुन्ना कितनी आम बात है। शाम को और वोह भी सर्दी की शाम को वहां घूमना तक मेह्फूस नहीं। जब मैं पढता था तो मेरी कई बार कहासुनी हुई मनचलो से जो हमारे साथ कड़ी लड़की पैर सीटी मार कर कुछ भी ब...

गाँधी जी

भोले हैं ये इतनी की ABCD तक नहीं आती।  वालमार्ट की भाषा पार्टी समझ नही पाती।।  नेता जी समाजवादी थे अपना पल्ला झाड़ा।  दूध से खुद को धुला  बताकर देसी झंडा गाड़ा।। वालमार्ट जी इनकी भाषा में इनको समझाओ। Franklin Benjamin नहीं, इन्हें गाँधी जी दिखलाओ।। 

घटनाएँ

काफी दिन बाद ब्लॉग लिखने का मन किया। मन तो कई दिनो से था लेकिन मुद्दे पैर टिपण्णी करने का मन सा नहीं हो रहा था। पैर क्यूंकि घटनाक्रम पिछले दिनो ऐसे चले की आज सोचा ब्लॉग को धन्य कर ही डालूँ। असल मैं कई घटनाएँ घटीं। रिटेल पैर FDI पैर सरकार की जीत, गुजरात मैं सत्ता की मारामारी, हिमाचल मैं चुनाव, अरविन्द केजरीवाल की आम पार्टी का आगमन, मनसे कोपोराटर का पैसंत साल के बुजुर्ग को अपमानित करना, ठाकरे जी का जाना और उनके जाने के बाद फेसबुक पैर टिपण्णी करके फंसी बेचारी दो लड़कियां, कसब को फांसी, पोंटी चड्ढा की हत्या और न जाने क्या क्या।  मैं इन सब मुद्दौं पैर थोडा थोडा अपनी राय रखना कहूंगा। उल्टा शुरू करता हूँ मान्यवर शराब के सदियौं से ठेकेदारी करने वाले पोंटी चड्ढा से। पहले खबर आई उनके भाई को गोली मार दी, दस मिनट बाद खबर आई वोह खुद ही चपेट मैं अगये और इन सब मैं एक नया नाम उभरा, जिसे आम आदमी उतना नहीं जनता था और वोह नाम था सुखदेव सिंह नामधारी का। नामधारी एक चोला पहनते हैं, सफ़ेद रंग का, लम्बी दाढ़ी है। देखते ही वोह एक संस्कारी सिक्ख दीखते हैं। शायद हों भी। लेकिन उनकी एक तस्वीर जो टीव...