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Showing posts from August, 2012

वाह सरकार !

दिल्ली से एक खबर उड़ी है, काया पलट हो जायेगा .  एक लकीर से नीचे वाला मोबाइल पा जायेगा.  गाजीपुर का अनपढ़ कल्लू, दिन भर गाना गाता है.  भीख में मिली अठन्नी देके घर पर दाना लाता है .  दाना खाके बीवी बच्चे सुबक सुबक सो जाते हैं.  सर्दी की हर रात सिकुड़ कर कोने में ठुठुराते हैं. टूटी छत्त से जब बारिश का पानी अन्दर आता है. कल्लू बैठा सिर्फ मोबाइल देख देख मुस्काता है. 

बात सिर्फ लोकपाल की?

बात  लोकपाल  की  नहीं , बात  सतपाल  की  है . सतपाल  जो  एक  आम  हिन्दुस्तानी  है . जिसने  सर  झुका  कर  हिंदुस्तान  का  विभाजन  नियति  मान  लिया ,  जिसने  1984 के  दंगो   को  सियासी  मसला  समझने  की  भूल  कर  ली . जो  आज  भी  कश्मीर  को  अपने  दुःख  से  बड़ा  दुःख  मानता  आया , व्हो  आज  भी  माने  बैठा  हँ  की  सर्कार  को  मैंने  चुना  है , बिना  वोट  दिए . जिसके  लिए  पकिस्तान  से  बड़ा  दुश्मन  कोई  नहीं , जिसके  लिए  सरकारी  दफ्तर  घूस  देने  का  मंदिर  है , जिसने  आज  तक  कभी  हिम्मत  नहीं  की  नेता  जी  के  काफिले से आगे  बढ़ने की , जो  मानता ...